Monday, December 8, 2025

मुक्तक

प्रेमी की नज़र में मैं वफ़ा-दार नहीं हूँ
माँ से दग़ा करने को मैं तैयार नहीं हूँ
पगड़ी पिता की रौंद के मैं इश्क़ निभाऊँ
कैसे करूँ ये जुर्म, मैं गद्दार नहीं हूँ
— त्रिशिका धरा


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