प्रियतम के मन हरने को ।
लाज है अधरों पर शोभित,
व्याकुल मन है प्रिय के आलिंगन में बिखरने को।
बिंदिया आज चमक रही माथे पे,
कुमकुम भी हैं आज अलमस्त।
झुमके गुनगुना रहे प्रेम गीत,
हृदय वेग तीव्र होगा देखें जो आज हमरस्त।
अजब मनमोहक सा आकर्षण है,
तीखे तीखे नैनो में बसे अंजन की लकीरों में ।
रेशमी काली जुल्फों के प्रेमपाश ही,
बांध लेंगे प्रियतम को प्रीत की जंजीरों में।
– अंजना दिलीप दास
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